नई दिल्ली, 11 सितंबर 2025: भारत जल्द ही अपने पहले स्वदेशी जेट इंजन के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। फ्रांस की सैफरान S.A. और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) एक संयुक्त परियोजना के तहत 120 किलो न्यूटन (KN) का जेट इंजन विकसित करेंगे, जो भारत के दो इंजन वाले उन्नत मध्यम युद्धक विमान (AMCA) को शक्ति प्रदान करेगा। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में स्वदेशी जेट इंजन विकास के आह्वान के बाद आया है
12 साल में 9 प्रोटोटाइप, 140 KN तक की शक्ति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संकेत दिया है कि भारत जल्द ही लड़ाकू विमानों के लिए इंजन विकसित करने की महत्वपूर्ण परियोजना शुरू करेगा। सैफरान और GTRE मिलकर 12 साल की अवधि में नौ प्रोटोटाइप विकसित करेंगे। शुरुआत में यह इंजन 120 KN की शक्ति प्रदान करेगा, जो परियोजना के अंत तक 140 KN तक बढ़ जाएगा। यह इंजन भारतीय बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत विकसित होगा, जिसमें सैफरान 100% तकनीक हस्तांतरण करेगा, जिसमें उन्नत क्रिस्टल ब्लेड तकनीक भी शामिल है।
क्रिस्टल ब्लेड, जो सुपर-एलॉय से बने एकल क्रिस्टल से निर्मित होते हैं, उच्च ताप और तनाव को सहन करने में सक्षम हैं, जिससे इंजन की दक्षता और स्थायित्व बढ़ता है। DRDO के पास यह तकनीक मौजूद है, लेकिन इसे उच्च शक्ति वाले जेट इंजनों के लिए अनुकूलित करना एक जटिल चुनौती है।
ये भी पढ़ें: नोएडा में यमुना बाढ़: विधायक पंकज सिंह ने हालात का जायजा लिया, राहत सामग्री बांटी
भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी
यह परियोजना पिछले दो वर्षों से विचाराधीन थी, लेकिन अब मोदी सरकार ने DRDO को प्रस्ताव तैयार करने और इसे शीर्ष स्तर पर मंजूरी दिलाने का निर्देश दिया है। यह इंजन AMCA को शक्ति देगा, जिसे टाटा समूह, L&T, और अडानी डिफेंस जैसे भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियां विकसित और निर्मित करेंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी जेट इंजन को रक्षा क्षेत्र की शीर्ष तकनीक बताया है, जिसके नागरिक उपयोग में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने अपनी स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित की है, जबकि चीन अभी भी रूसी या रिवर्स-इंजीनियर्ड इंजनों पर निर्भर है। भारत का पिछला प्रयास, कावेरी इंजन, सफल नहीं हो सका था।
अमेरिका बनाम फ्रांस: भरोसेमंद साझेदार
हालांकि अमेरिकी कंपनी GE भारत को 212 F-404 इंजन आपूर्ति कर रही है और GE-414 इंजन की तकनीक का 70% हस्तांतरण कर रही है, लेकिन भारत ने फ्रांस को इस परियोजना के लिए चुना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी ऑफर अक्सर शर्तों और रणनीतिक बाधाओं के साथ आता है, जबकि फ्रांस ने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों के दौरान भी भारत का साथ दिया था। फ्रांस ने तब मिराज 2000 लड़ाकू विमानों के लिए स्पेयर पार्ट्स और INGPS सिस्टम की आपूर्ति जारी रखी थी।
नौसेना और भविष्य की संभावनाएं
यह 120-140 KN इंजन न केवल AMCA, बल्कि भारतीय नौसेना के दो इंजन वाले डेक-आधारित लड़ाकू विमानों को भी शक्ति देगा। यह भारत की वायुसेना और नौसेना को तीसरे देशों पर निर्भरता से मुक्त करेगा। सैफरान का 73 KN M-88 स्नेकमा इंजन पहले से ही भारत के 36 राफेल लड़ाकू विमानों को शक्ति देता है। इसके अलावा, भारत दसॉ (Dassault) के साथ 114 अतिरिक्त मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों के निर्माण पर भी विचार कर रहा है, जिससे रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
सैफरान और DRDO की यह साझेदारी भारत को रक्षा और विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 100% तकनीक हस्तांतरण और भारतीय IPR के साथ, यह परियोजना न केवल AMCA और नौसेना के विमानों को सशक्त बनाएगी, बल्कि भविष्य में निर्यात के अवसर भी खोलेगी। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नया युग शुरू करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।



