पीएम मोदी की चीन यात्रा: SCO शिखर सम्मेलन में सीमा विवाद सुलझाने का संकल्प, शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता

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  • September 1, 2025
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तियानजिन में SCO समिट की शुरुआत

तियानजिन, 1 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दो दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचकर इतिहास रचा। यह उनकी सात साल बाद पहली चीन यात्रा है, जो गलवान संघर्ष के बाद हो रही है। मोदी का स्वागत भारतीय समुदाय ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से किया। उन्होंने होटल में चीनी कलाकारों द्वारा सितार, संतूर और तबला पर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रदर्शन देखा। सम्मेलन में मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता की, जहां दोनों ने सीमा पर शांति और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा कि दोनों देश विकास साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं।

मोदी-शी वार्ता: सीमा विवाद और आतंकवाद पर चर्चा

मोदी और शी की मुलाकात तियानजिन के मीजियांग कन्वेंशन सेंटर में हुई। दोनों ने सीमा विवाद सुलझाने का संकल्प लिया और कहा कि मतभेदों को विवाद न बनने दें। मोदी ने पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया, जिस पर चीन ने भारत का समर्थन किया। मिश्री ने बताया कि वार्ता में दीर्घकालिक विकास और सहयोग पर फोकस रहा। मोदी ने शी को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए आमंत्रित किया। दोनों नेताओं ने रूस के कजान में 2024 ब्रिक्स बैठक के बाद संबंधों में सकारात्मक गति का स्वागत किया। यूएस के टैरिफ और व्यापार नीतियों के छाया में यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अन्य नेताओं से मुलाकात: क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

मोदी ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सरदार बर्दीमुहामेदोव, उज्बेकिस्तान के शावकत मिर्जियोयेव, किर्गिस्तान के सदिर जापारोव, आर्मेनिया के निकोल पाशिन्यान और वियतनाम के फाम मिन्ह चिन्ह से मुलाकात की। इनमें रक्षा, व्यापार, हरित ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से फोन पर बात की, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष पर शांति प्रयासों का समर्थन जताया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मोदी की द्विपक्षीय बैठक हुई, जहां ब्रिक्स और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए गए। पुतिन ने कहा कि रूस-चीन ब्रिक्स को मजबूत कर रहे हैं, जो वैश्विक बहुपक्षीयता के लिए जरूरी है।

SCO का महत्व: अमेरिका को चुनौती, लेकिन अस्पष्ट पहुंच

SCO समिट को अमेरिका की व्यापार और क्षेत्रीय नीतियों के खिलाफ चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हैं, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी हैं। समिट में बहुपक्षीय एशिया और विश्व की दिशा पर चर्चा हो रही है। मोदी ने प्लेनरी सेशन को संबोधित किया, जहां उन्होंने क्षेत्रीय शांति और सतत विकास पर जोर दिया। चीनी रोबोट ने समिट में भारत की सराहना की। समिट का उद्घाटन शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन द्वारा बैंक्वेट से हुआ। मोदी की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत का संकेत दे रही है।

वैश्विक संदर्भ में मोदी की भूमिका

यह यात्रा यूएस के नए टैरिफ और ट्रंप की नीतियों के बीच हो रही है। मोदी ने पुतिन से मिलकर रूस-भारत संबंधों को मजबूत किया। समिट में SCO को वैश्विक चुनौतियों से निपटने का मंच बताया गया। मोदी सोमवार को भारत लौटेंगे। यह यात्रा क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है।

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