औरंगाबाद, 27 अक्टूबर 2025। बिहार के औरंगाबाद जिला में बसे देवार्क सूर्य मंदिर छठ पूजा के समय सूर्यदेव और छठी मइया के भक्तन के बीच खास ठिकाना बा। इहाँ सूरज के वैदिक नाम ‘अर्क’ के समर्पित मंदिर बा, जे वैदिक काल से जुड़ा हुआ बा। मंदिर के पच्छिममुखी वास्तुकला इहाँ के और सूर्य मंदिरन से अलग बनावे ला, और छठ के दौरान इहाँ भक्तन के भीड़ उमड़ल बा। सूर्य पूजा के प्राचीन परंपरा के साथ-साथ, इहाँ छठी मइया के प्रकट होने की कथा भी बा, जे भक्तन में गजब के जोश भर देला। आइए, इ मंदिर के खासियत और छठ से जुड़ी मान्यता के बारे में जाने ला।
देवार्क: सूर्यदेव और छठी मइया के तपस्थली
बिहार के संस्कृति में सूरज के पूजा युगन-युगन से चली आवे ला। वेदन में सूर्य के ‘अर्क’ कहल गइल बा, जेकर माने ऊर्जा के रस। ‘ओम अर्काय नम:’ मंत्र सूर्य नमस्कार के हिस्सा बा, जे सूर्यदेव के प्रणाम के संदेश देला। औरंगाबाद के देवार्क सूर्य मंदिर इहे परंपरा के जीवंत प्रमाण बा। पुराण कथा के मुताबिक, इ मंदिर त्रेता-द्वापर युग से जुड़ा बा, हालाँकि इतिहासकार छठी से आठवीं सदी के बीच इहाँ के निर्माण बतावे लन।
कहानी कहे ला कि जब शिव के गण माली-सुमाली (रावण के नाना) कठिन तप करत रहन, त इंद्र डर गइलन और सूर्यदेव से ताप बढ़ावे के कहलन। शिवजी नाराज भइलन और सूर्यदेव के त्रिशूल से भेद दिहलन। सूरज के तीन टुकड़ा धरती पर गिरल—एक देवार्क (बिहार), दूसरा लोलार्क (काशी), और तीजा कोणार्क (ओडिशा) में। इहे से इ मंदिरन के त्रिकोणीय महत्व बा।
छठी मइया के प्रकट होने की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, जब देव-असुर संग्राम में असुर जीत गइल रहन, त देव माता अदिति इहाँ देवारण्य में छठी मइया के तप कइलन। छठी मइया प्रसन्न भइलन और अदिति के तेजस्वी पुत्र के वरदान दिहलन। इहे से त्रिदेव रूप आदित्य भगवान जनम लिहलन, जे असुरन पर देवतन के जीत दिलवइलन। ज्योतिष में षष्ठम भाव शत्रु पर विजय और संतान रक्षा से जुड़ा बा, जेकर वजह से छठी मइया संतान सुख और सुरक्षा की देवी कहलावे लन।
मंदिर के खासियत: पच्छिममुखी वास्तुकला
देवार्क सूर्य मंदिर के वास्तुशिल्प गजब बा। ज्यादातर सूर्य मंदिर पूरबमुखी होला, लेकिन इ पच्छिममुखी बा। पत्थरन के नक्काशी से बना इ मंदिर शिल्पकला के उत्कृष्ट नमूना बा। छठ पूजा के दौरान इहाँ व्रती सूर्यदेव और छठी मइया के अर्घ्य देत बा, और भक्ति भजन से माहौल जीवंत हो जाला। मंदिर के पास जलाशय में अर्घ्य देके भक्त अपन कामना पूर्ण करे ला।
छठ पूजा में मंदिर के महत्व
छठ के चार दिनन में—नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, और उषा अर्घ्य—देवार्क मंदिर भक्तन के भीड़ से गूँज उठे ला। इहाँ सूर्यदेव के साथ छठी मइया के पूजा की परंपरा बिहार के संस्कृति के गहरा जड़ बा। भक्त मानत बा कि इहाँ अर्घ्य देने से संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि मिले ला। मंदिर के इतिहास और छठी मइया के प्रकट होने की कथा इहाँ के आध्यात्मिक महत्व बढ़ावे ला।
काहे खास बा देवार्क?
- वैदिक परंपरा: सूर्य के ‘अर्क’ रूप और छठी मइया के तपस्थली के रूप में मान्यता।
- पच्छिममुखी मंदिर: अनूठी शिल्पकला, छठी-अठवीं सदी के नक्काशी।
- छठ का केंद्र: भक्तन के लिए सूर्य अर्घ्य और भक्ति का प्रमुख ठिकाना।



